एक सुबह जब उठा तो अखबार न मिला ,सोचा इन्टरनेट पर हे खबर पढ़ लूं.
राहुल गाँधी और भट्टा परसौल के हंगामे के इलावा "मोहल्ला लाइव" वेबसाइट पर नज़र डाली.
पहले ही पृष्ट पर दो ख़बरों ने मेरा ध्यान आकर्षित किया.
पहला- नवभारत ने अमर वाणी को अपने ऑनलाइन पृष्ट से हटायी,और दूसरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुनिए एक दलाल नेता की "अमर" वार्ता.
अपने ब्लॉग में अविनाश जी ने बड़े ही रोचक अंदाज़ पुरे टेप की व्याख्या की है,मुझसे रहा न गया और मैंने एक एक कर उसे सुनना शुरू किया .
इत्तेफाक से पहली क्लिप बिपाशा और अमर जी के बीच की मिल गयी जिसमे बुढ़ापे में भी अपनी जवानी पेश करते हुए अमर सिंह सुनने में आये.
आगे बढ़ा तो अनिल अम्बानी जैसी हस्ती भैया जी भैया जी करते हुए अपना काम निकलवाते,और मीडिया में खबर फैलाने पर शुभाष चन्द्र पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते सुनायी दिये.
इनकी बातो को सुनकर ये समझ में आ रहा था के आज किस तरह राजनीति और व्यापार एक दुसरे का पूरक होता जा रहा है.
चूँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस टेप को सुनाने की इजाज़त दे दी है तो मैंने भी सोचा के अपने दोस्तों और बड़ों के साथ इसे साझा करूँ.
मैंने अपने प्रोफाइल में इसे पोस्ट कर दिया,,,ये वाकया था करीब ११ बजे का.
मगर इस कहानी में नया मोड़ तब आता है जब दूसरों पर थूक फेकने वाले वेबसाइट ने खुद अपने पर हे थूक फेक डाली.
जी हाँ!
करीब २ बजे
"नवभारत" पर ऊँगली उठाने वाले "मोहल्ला लाइव" ने खुद अपने हे वेबसाइट से मुख्य-मुख्य क्लिप का ख़ास अंश हे ग़ायब कर दिया.
मै ये देखकर सन्न रह गया की ये क्या है????????
हर जगह पोलिटिक्स ने अपना पैर जमा रखा है??
निश्चय ही उस टेप में अनिल अम्बानी,सुभाष चन्द्र जैसे लोगों का नाम एवं उनकी अभद्र वाणी थी.मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी तो कुछ सोच समझा कर ही इसे सार्वजानिक करने की अनुमति दी.
फिर इसे हटाया क्यों गया???
ये सवाल मैंने वहां मौजूद कमेंट्स में भी पोस्ट किया पर शायद ये सवाल उन्हें ना-गवार गुजरी,और उन्होंने कमेन्ट पोस्ट भी नहीं किया.
इस पुरे घट्न क्रम में मुझे नयी चीज़ समझ में आयी जिसे मै सभी के साथ शेयर करना चाहूँगा " कि कभी भी कोई भी सुराग या सबूत कुछ भी हाथ लगे पहले अपने कब्ज़े में करो फिर आगे कि सोचों"
मेरे ख्याल से शायद इससे मन को संतुष्टि मिलेगी!!!!!!!!
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